कुदसिया बाग़ मुग़ल साम्राज्य

दिल्ली की पुरानी बस्ती में स्थित कुदसिया बाग़ मुग़ल साम्राज्य के सुनहरे दौर की एक ख़ूबसूरत निशानी है1857 में जब भारत में आज़ादी की लड़ाई छिड़ गई तो कुदसिया बाग़ भी इसका हिस्सा बन गया। 


विद्रोहियों ने इसे अपनी चौकी बना लिया और अंग्रेज़ों से लोहा लिया। मगर अंग्रेज़ों की तोपों ने इस शान को तहस-नहस कर दिया, बाग़ के ज़्यादातर हिस्से खंडहर बनकर रह गए।




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1आज जो कुदसिया बाग़ बचा है, वो वाक़या सिर्फ पत्थरों का समूह नहीं है। वो ज़माने की शहज़ादी का ख्वाब, एक सल्तनत का ज़वाल और आज़ादी की जंग का गवाह है। 


दरवाज़े के सुंदर मेहराब, शाही मस्जिद की निशानियाँ और स्तंभित मंडप के अवशेष, ये सब मिलकर हमें एक ऐसी दास्तान सुनाते हैं, जिसे इतिहास की किताबों में नहीं ढूंढा जा सकता।







2कुदसिया बाग़ दिल्ली का एक ख़ास पर्यटन स्थल है। यहाँ आने वाले लोग इन खंडहरों के बीच से गुज़रते हुए मुग़ल साम्राज्य के सुनहरे दौर और आज़ादी की लड़ाई के ज़माने को महसूस कर सकते हैं।

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